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प्रमोशन नहीं, संरक्षण का खेल..? शिक्षा विभाग में सेटिंग और पक्षपात के आरोपों से मचा हड़कंप..!

प्रमोशन नहीं, संरक्षण का खेल..? शिक्षा विभाग में सेटिंग और पक्षपात के आरोपों से मचा हड़कंप..!

बिलासपुर शिक्षा विभाग में प्रमोशन का बड़ा खेल? DEO विजय टांडे और संयुक्त संचालक आर.पी. आदित्य पर उठे सवाल, “चहेतों को फायदा पहुंचाने नियमों की बलि” का आरोप

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बिलासपुर। बिलासपुर शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों और आरोपों के केंद्र में आ गया है। सहायक शिक्षकों की प्रधान पाठक पद पर हुई पदोन्नति को लेकर अब मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है। युवा कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव और पूर्व जिला पंचायत सदस्य अंकित गौरहा ने जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और संयुक्त संचालक कार्यालय से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे प्रमोशन प्रक्रिया को “संदिग्ध, पक्षपातपूर्ण और नियम विरुद्ध” बताया है।


गौरहा ने संयुक्त संचालक शिक्षा आर.पी. आदित्य को भेजी शिकायत में आरोप लगाया है कि संचालक लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश का गलत अर्थ निकालकर कुछ चुनिंदा शिक्षकों को लाभ पहुंचाने के लिए पदोन्नति का खेल खेला गया। शिकायत में साफ तौर पर कहा गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो मामला लोकायुक्त और हाईकोर्ट तक ले जाया जाएगा।
162 शिक्षकों की सूची के बाद अचानक बदला खेल
जानकारी के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे के कार्यालय द्वारा 27 दिसंबर 2024 को सहायक शिक्षक से प्रधान पाठक पद पर 162 शिक्षकों की पदोन्नति सूची जारी की गई थी। यह सूची जिला स्तरीय वरिष्ठता क्रम के आधार पर तैयार की गई थी।
इसके बाद 8 जनवरी 2026 को संचालक लोक शिक्षण संचालनालय ने एक पत्र जारी किया, जिसमें विभागीय त्रुटियों के कारण पदोन्नति से वंचित पात्र शिक्षकों को अवसर देने की बात कही गई थी।
लेकिन आरोप है कि इसी आदेश को आधार बनाकर 20 मार्च 2026 को टंकेश्वर जगत, फुलेश सिंह, ईश्वरी ध्रुव, हेमलता पटेल और आस्था गौरहा को अचानक पदोन्नति दे दी गई और उन्हें बिल्हा ब्लॉक के स्कूलों में पदस्थ कर दिया गया। वरिष्ठता में पीछे फिर भी प्रमोशन पहले, आखिर किसके इशारे पर चला खेल?
पूरा विवाद अब वरिष्ठता सूची को लेकर खड़ा हो गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि जिन शिक्षकों को पदोन्नति दी गई, वे जिला वरिष्ठता सूची में काफी पीछे थे। हेमलता पटेल – वरिष्ठता क्रमांक 165 ईश्वरी ध्रुव – 166,आस्था गौरहा – 167,फुलेश सिंह – 170,टंकेश्वर जगत – 171 जबकि इनसे ऊपर वरिष्ठता क्रम में मौजूद —देवी नारायण पटेल – 163
चमेली साहू – 164 शत्रुघन कुमार जांगड़े – 168
भानू केसरी – 169 — को पदोन्नति नहीं दी गई।
यही वह बिंदु है जिसने पूरे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब आरोप लग रहे हैं कि “सेटिंग” और “चयनात्मक लाभ” के आधार पर प्रमोशन बांटे गए।
शिक्षा विभाग के गलियारों में चर्चा तेज है कि आखिर वरिष्ठता सूची को किन परिस्थितियों में नजरअंदाज किया गया? क्या नियम सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए बदले गए? और क्या पूरा मामला प्रभाव, दबाव और संरक्षण का परिणाम है?
बिना काउंसलिंग, बिना पारदर्शिता… चुपचाप जारी कर दिए आदेश
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूरी पदोन्नति प्रक्रिया में न तो काउंसलिंग कराई गई, न सभी रिक्त पदों को भरा गया और न ही 29 मार्च 2023 के विभागीय निर्देशों का पालन किया गया।
आरोप है कि विभाग ने चुपचाप आदेश जारी कर शिक्षकों को चांटीडीह, मटियारी, खुड़ीयाडीह, मंजूरपहरी और पासीद जैसे स्कूलों में पदस्थ कर दिया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रक्रिया पारदर्शी थी ही नहीं, तो आखिर चयन किन आधारों पर हुआ? क्या विभागीय नियमों को ताक पर रखकर “अपने लोगों” को फायदा पहुंचाया गया?
DEO विजय टांडे और संयुक्त संचालक आर.पी. आदित्य पर बढ़ा दबाव
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि पदोन्नति आदेश उनके कार्यालय से जारी हुए। वहीं संयुक्त संचालक आर.पी. आदित्य पर अब यह दबाव बढ़ गया है कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं और यह स्पष्ट करें कि क्या संचालक लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश का गलत उपयोग किया गया। अंकित गौरहा ने अपने आवेदन में साफ लिखा है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो यह माना जाएगा कि दोषी अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है।

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“प्रमोशन नहीं, भ्रष्टाचार का संरक्षण?”

इस पूरे मामले ने बिलासपुर शिक्षा विभाग की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिन शिक्षकों को वरिष्ठता के आधार पर मौका मिलना चाहिए था, वे आज भी इंतजार कर रहे हैं, जबकि कथित तौर पर “चिन्हित” लोगों को पदोन्नति दे दी गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या शिक्षा विभाग में नियमों से ज्यादा प्रभाव काम कर रहा है?
क्या प्रमोशन प्रक्रिया निष्पक्ष थी या फिर यह पूरा खेल पहले से तय था?
और क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला भी अन्य फाइलों की तरह दबा दिया जाएगा? फिलहाल पूरे मामले ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है और अब सभी की नजर संयुक्त संचालक आर.पी. आदित्य की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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